शनिवार, 12 नवंबर 2011

दर्द का रिश्ता

बहुत अच्छा किया
जो तुमने
तोड़ दिया दर्द का
रिश्ता|

छुड़ा लिया दामन
मेरे नशीब के
काँटों से|

दुआयें  दे रहा हूँ
के मुबारक हो तुझे
बहोरों के दिन
जमाने की खुशियाँ|

पर ये न समझाना
के तुम्हारे बिना
मैं किसी भूले हुए
मज़ार की तरह
बिघर जाऊँगा||

मैंने प्यार किया प्यार
और तेरी जुदाई के
तूफानों के बीच
इस प्यार का दिया
अपने खून-ए-जिगर
से जलाता रहूँगा||

(बिलासपुर, मंगलवार १० अप्रैल २००१)

नयी राह


चलते-चलते जीवन पथ पर,
एक नदी के सुंदर तट पर|
देख किसी तरुवर की छाया,
सुस्ताने को मन हो आया||

 

 

कर विचार यह सुंदर उपवन,
सुखकर होगा इसमें जीवन|
संगी-साथी मीत बनाये,
प्रेम भाव के दीप जलाये||

यह करते कुछ समय बिताया,
फिर नियति ने खेल दिखाया|
कल तक जिसको श्रम से साधा,
आज लगे वह पग में बाधा||

 

 

हा! कितना छल? मायामय जीवन!
पल-पल नित नूतन परिवर्तन|
तिनका-तिनका नीड़ बनाकर,
फिर चल निकले नयी राह पर||

( नागपुर सोमवार, २८-०४-२००३)

सवाल

कुछ तुकबन्दियाँ सुनकर
लोग कहने लगे हैं
कि मैं कवि हूँ.
साहित्य के क्षितिज पर
उगता हुआ
रवि हूँ.


सबेरा होने को है
और कालिमा
दम तोड़ रही है,
पर अपने पीछे
मन में
एक सवाल छोड़ रही है.

जब मेरी कविता के
उजाले में
उनका दोष दिखाई देगा,
तब भी क्या ये समाज
मुझे हाथों-हाथ लेगा?

(शनिवार, १० जुलाई २०००)