दीप से जगमग दिवाली, झिलमिलाये घर हमारा। हम बनें वो दीप जिससे, जगमगाए जग ये सारा॥ कर सकें कुछ काम ऐसा, कि खिलें चेहेरे सभी के। ना रहे कोई अकेला, बाँट लें सुख-दुःख सभी से। हो खुशी ऐसी कि जिसमें, खुश रहे संसार सारा। हम बनें वो दीप जिससे... दीप जलता और लड़ता, रात के अंधियार से। हम मिटा दें दुश्मनी, और वैर इस संसार से। यूँ जलाएं प्रेम-दीपक, हो जगत-भर में उजारा। हम बनें वो दीप जिससे... |
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