Friday, November 11, 2011

दर्द का रिश्ता

बहुत अच्छा किया
जो तुमने
तोड़ दिया दर्द का
रिश्ता|

छुड़ा लिया दामन
मेरे नशीब के
काँटों से|

दुया दे रहा हूँ
के मुबारक हो तुझे
बहोरों के दिन
जमाने की खुशियाँ|

पर ये न समझाना
के तुम्हारे बिना
मैं किसी भूले हुए
मज़ार की तरह
बिघर जाऊँगा||

मैंने प्यार किया, प्यार
तेरी जुदाई के
तूफानों के बीच
इस प्यार का दिया
अपने खून-ए-जिगर
से जलाऊंगा||

(बिलासपुर, मंगलवार १० अप्रैल २००१)