बीत रही है
रात-
नया सूरज आएगा,
मन रे!
रख ले धीर-
पीर यह मिट जायेगा ।१।
आशा की लालिमा -
देख!
पूरब में छायी,
पंछी के कलरव भी
अब-
दे रहे सुनाई ।२।
उदयाचल का रूप-
अलौकिक
निखर रहा है,
देख!
उजाला-
धीरे-धीरे
पसर रहा है ।३।
मंगलवार, 24 अगस्त 2010
मुन्ना की लोरी-१
सूरज डूबा, चंदा आया, रात आयी कारी सी मुन्ना मेरा सोयेगा, निंदिया लायी प्यारी सी। पंछी देखो उड़-उड़कर, अपने घर को चले गए साँझ हुआ तो तीतर-बन्दर, भालू मामा चले गए। लाला मेरा धीरे-धीरे, अब बिस्तर में जायेगा अंखिया अपनी मूंदे-मूंदे, सपनों में खो जायेगा। रात सुहानी बीत रही है, भोर कहीं न हो जाये मम्मी मीठी लोरी गाये, मुन्ना राजा सो जाये। | ![]() |
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मनीष पाण्डेय "मनु"
कीपोर्ट, न्यू जर्सी, मँगलवार २४ अगस्त २०१०
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