शनिवार, 12 नवंबर 2011

दर्द का रिश्ता

बहुत अच्छा किया
जो तुमने
तोड़ दिया दर्द का
रिश्ता|

छुड़ा लिया दामन
मेरे नशीब के
काँटों से|

दुआयें  दे रहा हूँ
के मुबारक हो तुझे
बहोरों के दिन
जमाने की खुशियाँ|

पर ये न समझाना
के तुम्हारे बिना
मैं किसी भूले हुए
मज़ार की तरह
बिघर जाऊँगा||

मैंने प्यार किया प्यार
और तेरी जुदाई के
तूफानों के बीच
इस प्यार का दिया
अपने खून-ए-जिगर
से जलाता रहूँगा||

(बिलासपुर, मंगलवार १० अप्रैल २००१)

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