शुक्रवार, 29 सितंबर 2023

याद

 याद तेरी आज भी मुझको पुकारे

दिल में मेरे आज भी तेरी छवि है 


कारनामे वो लड़कपन के हमारे

दोस्ती क्या चीज है तुमने सिखाया

खून के रिश्ते नहीं हम खुद बनाते

खुशनसीबी है कि तुझसा यार पापा

खेल जो खेले कभी हम साथ मिलकर

उन दिनों की याद तो भूली नहीं है

दिल में मेरे आज भी…


यूँ तो अब भी साथ में संगी खड़े हैं 

पर कमी तेरी सदा खलती हवा में

छोड़कर यूँ साथ जो तुम चल दिये तो

मैं अकेला पड़ गया हूँ इस जहां में

दोस्ती का रंग जो तेरा चढ़ा फिर 

और कोई रंग अब चढ़ता नहीं है 

दिल में मेरे आज भी…


कोई टिप्पणी नहीं: