रविवार, 25 नवंबर 2007

प्यार हो गया है

मूँद लेती हो उन्हें
अपनी पलकों से
जो ये नज़रें चार होती हैं,

करती हो
कोशिश छिपाने की
उस तस्वीर को

जो साफ
नजर आती है
तुम्हारी निगाहों में,

पर मैं खूब समझता हूँ,

महसूस लेता हूँ
तुम्हारे दिल की बातों को,

ताड़ लेता हूँ वो बातें
जो तुम चाहकर भी
नहीं लाती
अपनी जुबान पर,

हाँ,

हाँ, मैं जानता हूँ कि
मेरी तरह
तुम्हें भी...

प्यार हो गया है!

2 टिप्‍पणियां:

Riya ने कहा…

Manish Ji ,
Achcha likha hai aapne ..
Yun to pyar ek bhawana hai..Pyar ko sirf mahsoos kiya ja sakta hai..Aur ise sirf wo hi samjha sakta hai jo is nauka per sawaar ho..
I really want to tell you that your this peotry is very-very nice..
Pyar ki sundar abhiyakti..
Pyar ki pawitra bhawanaa..
God bless you with your love..
Ameen..(Ir really some one is there!!)

Manish Pandey ने कहा…

Riya Ji,

With each one of your comment you are leaving me without words!!

Love is another name of scrifies, in love you do not think of what you want, but what you can give.

I am thankful for your appriciations. Greatful for all your comments as they give strength and vision to improve!