शनिवार, 28 अक्टूबर 2023
प्यार है
सोमवार, 9 अक्टूबर 2023
पितर
हे! पितर
आज हमने
बड़े बनाये थे
आपको अर्पण करने
जमाना बदल रहा है
लोग अब
तला खाने से
बचते हैं ना
इसलिए
एयर फ्रायर में बने थे
कौवों को दिया था
जो आते हैं
मुँडेर पर
उन्होंने तो पसंद आया
वे झूम गये थे
खाने के लिए
आशा है
आपको भी
अच्छे लगे होंगे
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मनीष पाण्डेय ‘मनु’
सोमवार ९ अक्टूबर २०२३, नीदरलैंड
रविवार, 1 अक्टूबर 2023
तेरी यादें
क्या हम यूँ ही बिछड़ने मिले थे
प्रेम के फूल बिखरने खिले थे
समझा जिसे बिन कहे दो दिलों ने
सच या भरम प्यार के सिलसिले थे?
जाने क्या हुआ उन सपनों उन वादों का
प्यार की तपिश में उफनते इरादों का
कोई दुआ ना हुई कबूल जो हमने माँगी
क्या हुआ जाने दिल के उन फरियादों का
तुझे याद करने का हासिल यही है
ये दुनिया लगे मेरे काबिल नहीं है
करना मुझे क्या जमाने से ऐसे
जो होने में तू मेरे शामिल नहीं है
कसमसाता समाज
क्या आप जानते हैं
बहुत जल्द
ऐसा भी दिन आयेगा
जब बच्चे अपनी माँ को
माँ नहीं कहेंगे
और पिता को
पिता नहीं कहेंगे
उन्हें कहना होगा
अभिभावक
या फिर शायद
कोई नया शब्द बनाया जाएगा
जिसमें माता-पिता का
बोध नहीं होगा
क्योंकि जब
स्त्री-पुरुष के मेल को ही
विवाह, परिवार या अभिभावक
नहीं माना जायेगा
तब तो
पति-पत्नी ही नहीं होंगे
फिर माता-पिता का
प्रश्न कहाँ से आएगा
और तो और
बेटा-बेटी नहीं होंगे
भाई-बहन नहीं होंगे
सभी रिश्तों के नाम
बदल दिये जाएँगे
क्योंकि
बदलते समय के साथ
समाज करवट ले रहा है
और इस कसमसाते समाज को
लैंगिक विविधता
स्वीकार नहीं है
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मनीष पाण्डेय ‘मनु’
रविवार 1 अक्टूबर २०२३, नीदरलैंड