शनिवार, 20 अप्रैल 2024
कैरोके भजन - राम कहूँ मैं
शुक्रवार, 12 अप्रैल 2024
कैरोके भजन - ओ मेरे राम जी
बुधवार, 10 अप्रैल 2024
अम्बे मेरी मैया
अम्बे मेरी नैया, पार लगा दे माँ बिगड़ी मेरी मैया, आज बना दे ना
ना जानू मैं पूजा तेरी, ना जानूँ मैं भक्ति गुण तेरे मैं गाऊँ कैसे, कुछ ना मेरी शक्ति पर मैया मैं बालक तेरा, रो रो तुझे पुकारूँ कब आएगी मैया मेरी, तेरी राह निहारूँ प्यारी मेरी मैया, दरस दिखा दे ना अम्बे मेरी नैया, पार लगा दे माँ धन दौलत के पीछे मैंने, इतने बरस बिताये कैसे-कैसे करम किए हैं, कितने पाँप कमाये राग-द्वेष में डूबा ऐसा, अहम भाव अपनाया अब जागा हूँ मैया तो, मैं तेरे द्वारे आया जग जननी तू मेरे, दोष भुला दे ना अम्बे मेरी नैया, पार लगा दे माँ
सिवा तुम्हारे इस जग में, मैया कौन हमारा सब के दुखड़े दूर करे माँ, ऐसा नाम तुम्हारा इतनी विनती है माता अब, तेरी भक्ति पाऊँ अम्बे तेरी कृपा हुई तो, भव सागर तर जाऊँ अपना मुझको मैया, दास बना ले ना अम्बे मेरी नैया, पार लगा दे माँ
बिगड़ी मेरी मैया, आज बना दे ना अम्बे मेरी नैया, पार लगा दे माँ
——————————————— मनीष पाण्डेय ‘मनु’ बुधवार 10 अप्रैल 2024, नीदरलैंड
शुक्रवार, 5 अप्रैल 2024
इंद्रधनुष
मंगलवार, 2 अप्रैल 2024
नमो नमो
अब बँटते हैं भगवान, बोल बम नमो-नमो
भक्तों में खींचातान, बोल बम नमो-नमो
कल तक जिनको गरियाते थे उनको साथ मिला लो
जोड़-तोड़ या हेरफेर से बस सरकार बना लो
अब कुर्सी ही ईमान, बोल बम नमो-नमो
मंदिर-मस्जिद जिनकी खातिर वोटों के टकसाल हैं
जनता उनके पाँव पखारे करते नहीं सवाल हैं
अब नेता ही भगवान, बोल बम नमो नमो
जनता दो रोटी को ताके नेता माल उड़ाये
ऐसा सौदा जिसमें मालिक कौड़ी में बिक जाये
देश फिर कैसे बने महान, बोल बम नमो नमो
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मनीष पाण्डेय ‘मनु’
मंगलवार 2 अप्रैल 2024, नीदरलैंड
सोमवार, 1 अप्रैल 2024
काले अंग्रेज
भूखे-नंगों, अगड़े-पिछड़ों ने
मिलकर निपटाए,
काले अंग्रेजों से शोषित
भारत माँ को भला बताओ
कौन बचाये?
जालियाँवाला बाग के
बंदूँकों का घोड़ा
दबा विदेशी हाथों से था,
राजपुताना के वीरो को
छलने वाला दाँव
उन्हीं मक्कारों में था,
लेकिन ये हैं कौन-
जो अपने ही लोगों के
सर-सीने पर बूट चलाये?
भारत माँ को…
मर जाने तैयार मगर
अपनी झाँसी देने
वो तैयार नहीं थी,
भीखा, अरुणा, कमलादेवी
सावित्री, बेगम हजरत, दुर्गा थी
लाचार नहीं थी,
पदक जीतने वाली बेटी
सिसक रही है घर में
किससे लड़ने जाये
भारत माँ को…
भरे सदन में नेहरू को
गरियाने वालों के भी
पीठ थपाये जाते,
एक वोट से कुर्सी टूटी
फिर भी डिगे बिना
गीत नये वो गाये जाते,
अब कैसे हैं नायक
जो कुर्सी की खातिर
जनता में द्वेष कराये
भारत माँ को…
तीन लाख का सूट
डेढ़ का चश्मा कोई डाल
फक़ीरी झाड़ रहा है,
भेड़ चाल चलती जानता को
जुमलों से भरमाते
झण्डे गाड़ रहा है,
चौकीदारी उसके हिस्से
एक-एक को चुनकर जो
निपटाता जाये
भारत माँ को…
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मनीष पाण्डेय ‘मनु’
सोमवार 01 अप्रैल 2024, नीदरलैंड